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Shri Mad Devi Bhagwat Hindi Sanskrit code 1897-1898 by Gita Press

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श्रीमद देवी भागवत में अद्भुत शक्ति और मातृभाव का गहराई से वर्णन है, जहां भगवती आद्याशक्ति की लीलाएं भक्तों के मन को आलोकित करती हैं। यह ग्रंथ सिर्फ पाठों का संग्रह नहीं, बल्कि आपके आत्मिक सफर का एक अनमोल साथी है, जो आपको दिव्य कृपा और ज्ञान का अनुभव कराता है।

Description

श्रीमद देवी भागवत: Must-Have Insights for Devotees

निवेदन पुराणवाङ्मय में श्रीमद देवी भागवत महापुराण का अत्यंत महिमामय स्थान है। यह पुराण उन ग्रंथों में से एक है, जिसे वेद के समान पवित्र और सभी गुणों से युक्त माना जाता है। इसे शक्ति के उपासक ‘शाक्त भागवत’ के नाम से भी जानते हैं।

श्रीमद देवी भागवत का महत्व

श्रीमद देवी भागवत न केवल एक धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि यह जीवन की गहरी समझ और आध्यात्मिक ज्ञान का भी स्रोत है। इसकी रचना के अंतर्गत भगवती आद्याशक्ति की महिमा का विस्तृत वर्णन किया गया है। पाठक इसे पढ़कर अपने भीतर की शक्ति को पहचान सकते हैं, जो उन्हें भक्तिमार्ग की ओर प्रेरित करती है।

इस ग्रंथ में भगवान का मातृरूप चित्रित किया गया है, जिससे भक्तों को न केवल आध्यात्मिक बल्कि भौतिक जीवन में भी मार्गदर्शन मिलता है। भगवती आद्याशक्ति की लीलाएँ अनंत हैं और उन लीलाओं का वर्णन ही इस ग्रंथ का मूल विषय है।

मातृभाव की महत्ता

संसार में मातृभाव का महत्व अनंत है। मानव की श्रद्धा स्वाभाविक रूप से माता के चरणों में समर्पित होती है। माता ही वह الأولى है, जो अपने बच्चों को इस संसार का दर्शन कराती है। इसीलिए, ‘मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव’ जैसे श्रुतिवाक्यों में सबसे पहले माता का उल्लेख है।

जो देवी महाशक्ति रूप में प्रतिष्ठित हैं, वे सभी प्राणियों की माता होने के साथ-साथ ज्ञान गुरु भी हैं। यह ज्ञात हो कि महाशक्ति ही परम ब्रह्म के रूप में विद्यमान हैं, जो विभिन्न रूपों में अनेकों लीलाएं करती रहती हैं।

देवी भागवत की शिक्षाएँ

श्रीमद देवी भागवत में देवी की शक्ति और उनके विभिन्न स्वरूपों की उपासना का महत्व बताया गया है। ब्रह्मा का सृजन, विष्णु का पालन और शिव का संहार—ये सभी कार्य देवी की शक्ति से ही संभव हैं।

महाशक्ति अपने विभिन्न रूपों में, जैसे कि साधक को ज्ञान देने वाली, माँ के रूप में, और शक्ति के रूप में भी प्रकट होती हैं। उदाहरण स्वरुप, नौ दुर्गाएँ तथा दस महाविद्याएँ भी इन्हीं का प्रतिनिधित्व करती हैं। देवी अन्नपूर्णा, जगद्धात्री, कात्यायनी, ललिता और अम्बा, हम सभी जानते हैं कि ये शक्तिमती हैं और शक्ति का स्वरूप हैं।

इसलिए, हमें समझना चाहिए कि हमारे जीवन का आधार शक्ति है। शक्ति से रहित मनुष्य का कहीं भी आदर नहीं किया जाता। ध्रुव और प्रह्लाद भक्ति-शक्ति के कारण पूजित हैं, जबकि गोपिकाएँ प्रेम-शक्ति के चलते पूजनीय बनी हैं।

शक्ति की प्रधानता

शक्ति की प्रधानता हर जगह दिखाई देती है। हनुमान और भीष्म की ब्रह्मचर्यशक्ति, वाल्मीकि और व्यास की कवित्वशक्ति, भीम और अर्जुन की पराक्रमशक्ति, हरिश्चंद्र और युधिष्ठिर की सत्यशक्ति, शिवाजी और राणाप्रताप की वीरता—यह सभी शक्तियों के उदाहरण हैं। ये सभी महापुरुष हमें प्रेरणा देते हैं कि कैसे हमें अपनी शक्ति के अनुसार कार्य करना चाहिए और अपने जीवन को सफलता की दिशा में अग्रसर करना चाहिए।

निष्कर्ष

अतः इस प्रकार कहा जा सकता है कि संसार की सम्पूर्णता महाशक्ति की लीला है। श्रीमद देवी भागवत का अध्ययन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन की गहरी समझ हासिल करने का एक माध्यम है। यह ग्रंथ न केवल हमें माता की महिमा का ज्ञान कराता है, बल्कि हमें अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और उसे जीवन में उतारने का भी मार्ग दिखाता है।

इसलिए, श्रीमद देवी भागवत को समझना और उससे प्रेरणा लेना हर श्रद्धालु के लिए आवश्यक है, ताकि वे अपने जीवन के हर पहलू में शक्ति और प्रेरणा प्राप्त कर सकें।

Additional information

Weight 3800 g
Dimensions 30 × 20 × 12 cm

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