Geeta Darpan code 8 (गीता दर्पण )

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भगवान्‌की दिव्य वाणी श्रीमद्भगवद्गीता के भाव बहुत ही गम्भीर और अनायास कल्याण करनेवाले हैं। उनका मनन करने से साधक के हृदय में नये-नये विलक्षण भाव प्रकट होते हैं। समुद्र में मिलनेवाले रत्नों का तो अन्त आ सकता है, पर गीता में मिलनेवाले मनोमुग्धकारी भावरूपी रत्नोंका कभी अन्त नहीं आता।

इस ‘गीता-दर्पण’ के माध्यम से गीता का अध्ययन करने पर साधक को गीता का मनन करने की, उसको समझने की एक नयी दिशा मिलेगी, नयी विधियाँ मिलेंगी, जिससे साधक स्वयं भी गीता पर स्वतन्त्र रूप से विचार कर सकेगा और नये-नये विलक्षण भाव प्राप्त कर सकेगा। उन भावों से उसको गीता वक्ता (भगवान्) के प्रति एक विशेष श्रद्धा जाग्रत होगी कि इस छोटे-से ग्रन्थ में भगवान्ने कितने विलक्षण भाव भर दिये है। ऐसा श्रद्धा भाव जाग्रत् होनेपर ‘गीता ! गीता !!’ उच्चारण करनेमात्र से उसका कल्याण हो जायगा।

Additional information

Weight 300 g
Dimensions 20 × 15 × 3 cm

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