Sale!

Harivansh Puran Only Hindi Code 1589 by Gita Press

Original price was: ₹450.00.Current price is: ₹440.00.

🔒
100% Secure Prepaid Payment
Pay safely online & save on extra charges. (COD not available)
UPI Paytm PhonePe Cards Net Banking
📖
100% Original
Genuine Gita Press print
🚚
Pan-India Shipping
Safe & well-packed
💬
WhatsApp Support
Real human help
Help??
Authentic GuaranteeDirectly sourced, never duplicate
📦
Careful PackagingBubble-wrapped so pages stay crisp
🔁
Damage ReplacementReport within 48 hrs with unboxing video
Free Delivery Above Purchase of ₹499No surprise charges at checkout

हरिवंशपुराण में सृष्टि, अवतार और नृत्य के अद्भुत पहलुओं की खोज करें, जो न केवल सांस्कृतिक धरोहर को समेटे है बल्कि गहरी आध्यात्मिक अंतर्दृष्टियों से भी भरपूर है। हरिवंश का अनूठा शैली और काव्यात्मकता इसे अन्य पुराणों से अलग बनाते हैं, एक ऐसी यात्रा जो आपको मंत्रमुग्ध कर देगी!

Description

हरिवंशपुराण: Stunning Insights for Best Understanding

हरिवंशपुराण, हिन्दू धर्म के प्रमुख पुराणों में से एक, भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस पुराण में तीन पर्व—हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व, और भविष्यपर्व—को 318 अध्यायों के माध्यम से सारांशित किया गया है। यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी इसे गहराई से जाँचना आवश्यक है।

हरिवंशपुराण के तीन पर्व

हरिवंशपुराण के तीन पर्वों में अद्वितीय विषयों का समावेश है।
हरिवंशपर्व: यह भाग श्री कृष्ण के जीवन की कथा को दिशा देता है, जिसमें उनके लीलाओं और अवतार की घटनाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह पर्व न केवल पौराणिक कथाओं को प्रस्तुत करता है, बल्कि जीवन की गहराई को भी उजागर करता है।
विष्णुपर्व: इस पर्व में नृत्य और अभिनय की सामग्री का अद्भुत संग्रह है। यहाँ पर छालिक्य नामक नृत्य शैली का उल्लेख मिलता है, जो संगीत, भाव और अभिनय का संगम प्रस्तुत करता है। भद्र नामक नट की कथा भी यहाँ महत्वपूर्ण है, जो अपने अभिनय के जरिए ऋषियों को प्रसन्न करता है।
भविष्यपर्व: यह पर्व पुराणों की सृष्टि में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके तहत सृष्टि की उत्पत्ति, ब्रह्म के स्वरूप, और अवतार गणना पर गहराई से विचार किया गया है। इस पर्व में स्मृतिसामग्री और सांप्रदायिक विचारधाराएँ भी शामिल होती हैं, जो इसे हरिवंशपर्व और विष्णुपर्व से अधिक आधुनिक बनाती हैं।

हरिवंशपुराण की साहित्यिक विशेषताएँ

हरिवंशपुराण की साहित्यिक विशेषताओं में उसकी काव्यात्मकता और अलंकारिक शैली का प्रमुख स्थान है। यह पुराण अन्य प्राचीन पुराणों की तुलना में काव्य के शिल्प और विषयवस्तु में अद्वितीय है। इसमें उपमा, रूपक और व्यतिरेक जैसे अलंकारिक तत्वों का समावेश है, जो पाठक को गहराई में जाकर सोचने पर मजबूर करते हैं।

हरिवंशपुराण का ऐतिहासिक दृष्टिकोण

ऐतिहासिक दृष्टि से हरिवंशपुराण का महत्व अत्यधिक है। विद्वानों का मानना है कि इसे महाभारत का प्रारंभिक पर्व माना जाना चाहिए। हापकिंस ने इसे महाभारत का अर्वाचीनतम पर्व कहा है, जबकि हाजरा ने इसके स्रोत को चतुर्थ शताब्दी के पुराणों से जोड़ा है। जटिल घटनाओं और पात्रों के संदर्भ में हरिवंशपुराण का अध्ययन विभिन्न पुराणों के आपसी संबंधों को समझने में सहायक होता है।

हरिवंशपुराण का सांस्कृतिक प्रभाव

हरिवंशपुराण ने भारतीय संस्कृति में एक स्थायी प्रभाव छोड़ा है। इस पुराण में उल्लिखित भाव, विचार और नैतिकताएँ आज भी लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण हैं। कथा के पात्रों की नैतिक शिक्षा और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी प्रभाव डालती हैं।

हरिवंशपुराण की शुद्धता

एक विशेष बात यह है कि हरिवंशपुराण का पाठ अन्य पुराणों की तुलना में अपेक्षाकृत शुद्ध और प्रामाणिक माना जाता है। पाश्चात्य विद्वानों के अनुसार, इसे स्वतंत्र वैष्णव पुराण के रूप में देखा जाना चाहिए। हरिवंश में न केवल धार्मिक लेकिन साहित्यिक दृष्टिकोण से भी गहराई और रचनात्मकता का समावेश है, जो इसे अद्वितीय बनाता है।

निष्कर्ष

हरिवंशपुराण एक अद्भुत संग्रह है जो धार्मिक, साहित्यिक, और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से हमे एक नई दृष्टि प्रदान करता है। इसके विभिन्न पर्व और अध्याय न केवल हमारे इतिहास की कहानी बयान करते हैं, बल्कि इसे फिर से जीने का एक अच्छा माध्यम भी बनाते हैं। इस पुराण के माध्यम से हम सीधे भारतीय अध्यात्म और संस्कृति की गहराइयों में उतर सकते हैं। इसलिए, हरिवंशपुराण का अध्ययन न केवल आवश्यक है बल्कि इसका आनंद लेना चाहिए।

Additional information

Weight 2500 g
Dimensions 27 × 25 × 8 cm

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Harivansh Puran Only Hindi Code 1589 by Gita Press”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like…